सोशल मीडिया की टाइमलाइन पर इन दिनों एक वीडियो ज़ोरों से घूम रहा है, जिसने भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के बारे में कहा“मैं नरेंद्र मोदी का राजनीतिक करियर खत्म कर सकता हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं चाहता।” इस एक लाइन को एप्सटीन फाइल्स, भारत-अमेरिका ट्रेड डील और हालिया वैश्विक घटनाओं से जोड़कर पेश किया जा रहा है। नतीजा अटकलों का तूफान। लेकिन जब हकीकत की ज़मीन पर उतरकर देखा गया, तो बात हवा में लटकी दिखती है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया, White House के आधिकारिक बयानों और हालिया रिपोर्ट्स में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता कि ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कोई धमकी भरा या सीधा बयान दिया हो। यानी वायरल दावा, लेकिन पुख्ता सबूत नदारद।
इसी बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर देश के भीतर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। Communist Party of India Marxist ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी की पोलित ब्यूरो का कहना है कि तथाकथित अंतरिम ट्रेड डील में अमेरिका को जरूरत से ज़्यादा रियायतें दी गई हैं खासतौर पर अमेरिकी कृषि उत्पादों को शून्य टैरिफ एंट्री। फल, कपास, मेवे, सोयाबीन तेल जैसे प्रोडक्ट्स का नाम लेते हुए सीपीएम ने चेतावनी दी कि इसका सीधा असर लाखों भारतीय किसानों पर पड़ेगा।
डील के फ्रेमवर्क के बाद अमेरिका ने रेसिप्रॉकल टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है। वॉशिंगटन का दावा है कि भारत रूस से तेल आयात कम करेगा, इसी वजह से दंडात्मक टैरिफ हटाया गया। ट्रेड डील को लेकर ट्रंप ने खुलकर तारीफ की और कहा कि अमेरिकी किसानों के लिए 140 करोड़ आबादी वाला भारतीय बाज़ार खुल गया है। वहीं भारत के वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने दो टूक कहा कि समझौते में भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया। तो आंकड़े क्या कहते हैं? कभी भारत के साथ व्यापार में घाटे से परेशान रहने वाला अमेरिका अब कुछ राहत महसूस कर रहा है। भारत द्वारा अमेरिकी सामानों का आयात बढ़ने से ट्रेड डेफिसिट घटा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में जहां भारत का व्यापार अधिशेष 3.17 अरब डॉलर था, वह नवंबर तक घटकर करीब 1.73 अरब डॉलर रह गया। कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो सियासी सनसनी जरूर पैदा कर रहा है, लेकिन फिलहाल यह दावे से ज़्यादा अफवाह लगता है। असली मामला ट्रेड डील, टैरिफ और किसानों के भविष्य को लेकर चल रही खींचतान में छुपी है बाकी सब शोर है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख और देश की राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में शुमार शरद पवार को स्वास्थ्य में अचानक आई गिरावट के बाद पुणे के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, पवार पिछले कुछ दिनों से गले में संक्रमण, तेज़ बुखार और लगातार खांसी की समस्या से जूझ रहे थे। चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें निगरानी में रखते हुए आगे के उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। बताया जा रहा है कि शरद पवार हाल ही में Baramati में मौजूद थे। वहीं उनकी तबीयत बिगड़ने पर स्थानीय स्तर पर प्राथमिक चिकित्सा और जांच की गई थी। हालांकि इलाज के बावजूद उनकी हालत में संतोषजनक सुधार नहीं हो पाया। इसके बाद डॉक्टरों ने एहतियातन उन्हें उच्च चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पताल में शिफ्ट करने की सलाह दी। इसी क्रम में सोमवार दोपहर पवार को Pune स्थित Ruby Hall Clinic ले जाया गया, जहाँ उन्हें भर्ती कर लिया गया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, भर्ती के समय पवार को सांस लेने में कुछ दिक्कत महसूस हो रही थी। उन्हें लगातार बलगम और खांसी की शिकायत थी, जिसके चलते अतिरिक्त सावधानी बरती गई। उनकी यात्रा के दौरान मेडिकल टीम पूरी तरह अलर्ट रही और काफिले के साथ कार्डियक सुविधाओं से लैस एम्बुलेंस को भी स्टैंडबाय पर रखा गया था। संक्रमण को देखते हुए पवार सुरक्षा मास्क पहनकर एक अलग वाहन में यात्रा करते नजर आए, जबकि मेडिकल सपोर्ट हर स्तर पर मौजूद था।
अस्पताल में उनके साथ उनकी बेटी और एनसीपी (एसपी) की सांसद Supriya Sule, उनके दामाद सदानंद सुले सहित परिवार के करीबी सदस्य मौजूद हैं। परिजन लगातार डॉक्टरों से संपर्क में हैं और पवार के स्वास्थ्य से जुड़ी हर जानकारी पर नजर रखे हुए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उम्र और मौजूदा लक्षणों को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखना ज़रूरी समझा गया है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि हाल के दिनों में शरद पवार लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों, बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। निजी क्षति और पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सार्वजनिक दायित्वों से दूरी नहीं बनाई। माना जा रहा है कि अत्यधिक व्यस्त कार्यक्रम और शारीरिक थकान का असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार सुबह बारामती स्थित गोविंदबाग में डॉक्टरों की टीम ने उनकी विस्तृत जांच की थी। जांच के बाद स्थिति को देखते हुए तत्काल पुणे ले जाने का निर्णय लिया गया। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और आवश्यक जांच व उपचार जारी है।