इन दिनों सोशल मीडिया पर एक अजीब लेकिन तेज़ी से फैलता ट्रेंड दिख रहा है, जिसमें लोग सिर्फ एक चम्मच लेकर दीवार, जमीन या किसी सख्त सतह को धीरे-धीरे खुरचते हुए वीडियो बना रहे हैं। वीडियो के साथ लिखा होता है Day 1, हर नए फॉलोअर पर एक खरोंच, या जब तक छेद नहीं हो जाता, तब तक जारी रहेगा। पहली नज़र में यह हरकत बेतुकी लगती है, लेकिन यही सादगी इस ट्रेंड को वायरल बना रही है। यह कोई अचानक पैदा हुआ पागलपन नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया एल्गोरिद्म और यूज़र बिहेवियर का सोचा-समझा नतीजा है। जांच में यह साफ होता है कि इस तरह के “धीमे लेकिन लगातार” टास्क वाले ट्रेंड पहले भी विदेशों में दिख चुके हैं। कई फॉरेन कंटेंट क्रिएटर्स ने असंभव या बेहद समय लेने वाले कामों को साधारण टूल्स से करने के वीडियो बनाए, जैसे घंटों तक चम्मच से बाथटब भरना या किसी सख्त सतह को कुरेदते रहना। वही आइडिया अब भारतीय सोशल मीडिया में लोकल अंदाज़ में अपनाया गया है। किसी एक क्रिएटर को इसका पक्का जनक कहना मुश्किल है, क्योंकि लगभग एक ही समय पर कई अकाउंट्स ने ऐसे “Day 1” वीडियो पोस्ट किए। लेकिन पैटर्न यही बताता है कि ट्रेंड बाहर शुरू हुआ और भारत में तेजी से कॉपी होकर वायरल हो गया।
इस ट्रेंड की असली ताकत इसकी simplicity है। इसमें न तो महंगे कैमरे की जरूरत है और न ही किसी खास स्किल की। एक चम्मच, एक दीवार और थोड़ा धैर्य बस यही इसका पूरा सेटअप है। वीडियो देखने वाला दर्शक हर बार यही सोचता है कि अगली बार क्या होगा और क्या वाकई दीवार टूट पाएगी। इसी curiosity पर खेला जाता है। क्रिएटर फॉलोअर्स को सीधे टास्क से जोड़ देता है, जिससे दर्शक खुद को इस “खुदाई मिशन” का हिस्सा मानने लगता है। यही वजह है कि एल्गोरिद्म ऐसे वीडियो को ज्यादा push करता है, क्योंकि इनमें watch time और engagement दोनों ज्यादा होते हैं। अगर इंटरनेट के इतिहास को देखें, तो ऐसे ट्रेंड पहले भी सामने आते रहे हैं। Ice Bucket Challenge ने एक साधारण हरकत को ग्लोबल मूवमेंट बना दिया था। Harlem Shake ने कुछ सेकंड के अराजक डांस से पूरी दुनिया को संक्रमित कर दिया। वहीं Tide Pod Challenge जैसे ट्रेंड्स ने यह भी दिखाया कि वायरल होने की होड़ कभी-कभी खतरनाक मोड़ ले सकती है। हर बार कॉमन फैक्टर यही रहा आसान आइडिया, मजबूत विजुअल और नकल करने की खुली छूट। फिलहाल चम्मच से दीवार खोदने वाला ट्रेंड सीधे तौर पर जानलेवा नहीं दिखता, लेकिन इसमें भी खतरे छिपे हैं। सार्वजनिक या किराए की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का जोखिम है, और कंटेंट की रेस में कोई अगला स्टेप इसे ज्यादा अजीब या खतरनाक बना सकता है। सोशल मीडिया पर अक्सर धैर्य और बेवकूफी के बीच की लाइन जल्दी मिट जाती है।