18 फ़रवरी की दोपहर अचानक दुनिया की डिजिटल धड़कन लड़खड़ा गई। YouTube जिस पर हर मिनट खबरें बनती हैं, करियर चलते हैं, क्लास लगती है और करोड़ों लोग अपना समय बिताते हैं अचानक भारत समेत कई देशों में ठप पड़ गया। स्क्रीन पर Something went wrong का मैसेज चमक रहा था, लेकिन असली something क्या था, यह किसी को समझ नहीं आ रहा था। वीडियो लोड नहीं हो रहे थे, लाइव स्ट्रीम बीच में अटक गईं, प्रीमियम यूज़र्स भी असहाय दिखे और क्रिएटर्स के डैशबोर्ड पर ग्राफ अचानक गिरने लगे। आउटेज मॉनिटर करने वाली वेबसाइट DownDetector पर शिकायतों की बाढ़ आ गई। अमेरिका में लगभग ढाई लाख से ज्यादा रिपोर्ट्स दर्ज हुईं, जबकि भारत में भी हजारों यूज़र्स ने एक साथ समस्या बताई। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और मैक्सिको से भी यही तस्वीर सामने आई। कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #YouTubeDown ट्रेंड करने लगा। मीम्स की बाढ़ आ गई, लेकिन इस हंसी के पीछे चिंता साफ दिख रही थी क्योंकि यह सिर्फ मनोरंजन का प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की कमाई और पढ़ाई का जरिया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters ने भी इस ग्लोबल आउटेज की पुष्टि की। कंपनी की ओर से बयान आया कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण सर्विस प्रभावित हुई और इंजीनियरिंग टीम समस्या को ठीक करने में जुटी है। कुछ घंटों बाद सर्विस धीरे-धीरे बहाल हुई, लेकिन तब तक डिजिटल दुनिया में बेचैनी का माहौल बन चुका था। यह पहली बार नहीं है जब इंटरनेट की बड़ी ताकतें अचानक घुटनों पर आई हों। 2021 में Facebook जो अब Meta हैं उसमें ऐतिहासिक आउटेज हुआ था, जब व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक घंटों तक बंद रहे और कंपनी को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। 2023 और 2024 में भी YouTube को क्षेत्रीय स्तर पर सर्वर और लॉग-इन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हर बार वजह टेक्निकल ग्लिच बताई गई, लेकिन हर बार एक बड़ा सवाल भी उठा क्या डिजिटल दुनिया कुछ गिने-चुने सर्वरों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो चुकी है? 18 फ़रवरी की यह घटना फिर वही चेतावनी देकर गई। कुछ घंटों का डाउनटाइम करोड़ों यूज़र्स के लिए सिर्फ असुविधा नहीं था, बल्कि डिजिटल इकोनॉमी की नब्ज़ पर लगा झटका था। कंटेंट क्रिएटर्स की कमाई रुकी, ब्रांड्स की लाइव कैंपेन थमीं, स्टूडेंट्स की ऑनलाइन क्लास अटक गईं।