इस वक्त पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी मैदान मे सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें एक बड़े राजनीतिक संदेश की ओर इशारा कर रही हैं। सुबह 7 बजे जैसे ही मतदान शुरू हुआ, शुरुआती दो घंटों में तस्वीर साफ होने लगी। सुबह 9 बजे तक पश्चिम बंगाल में 18.76 प्रतिशत और तमिलनाडु में 17.69 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। यह सामान्य शुरुआत मानी जा सकती थी, लेकिन अगले दो घंटों में जो हुआ, उसने चुनावी विश्लेषकों को चौंका दिया। सुबह 11 बजे तक पश्चिम बंगाल में मतदान सीधे 41.11 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा 37.56 प्रतिशत दर्ज किया गया। यानी सिर्फ दो घंटों में करीब 20 प्रतिशत की छलांग यह बताने के लिए काफी है कि जनता इस बार चुप नहीं बैठी है, बल्कि खुलकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रही है। पश्चिम बंगाल में इस बार का चुनाव खास तौर पर ज्यादा संवेदनशील और निर्णायक माना जा रहा है। राज्य की कुल 294 सीटों में से पहले चरण में ही 152 सीटों पर मतदान हो रहा है, जो अपने आप में चुनाव की दिशा तय करने वाला बड़ा फैक्टर है। सूत्रों के अनुसार इन सीटों पर करीब 3.5 से 3.6 करोड़ मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं, हालांकि ये नंबर कन्फर्म नहीं है और ये वही क्षेत्र हैं जहां पिछले चुनावों में सत्ता का झुकाव बदलता रहा है खासतौर पर उत्तर बंगाल और सीमावर्ती इलाके, जहां राजनीतिक पकड़ को लेकर लगातार संघर्ष चलता रहा है। इस चुनाव का सबसे बड़ा केंद्रबिंदु सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress और चुनौती पेश कर रही बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। एक तरफ ममता बनर्जी की सरकार अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ भाजपा इस बार सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है। कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर दिग्गज उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और भी ज्यादा दिलचस्प हो गया है। हालांकि, चुनावी जोश के बीच कुछ तनावपूर्ण खबरें भी सामने आई हैं। मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों से झड़प और हिंसा की खबरें आईं, जिसने एक बार फिर बंगाल चुनावों की संवेदनशीलता को उजागर किया। इन हालातों को देखते हुए Election Commission of India ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। हजारों केंद्रीय बलों की तैनाती, वेबकास्टिंग और हर बूथ पर निगरानी के जरिए चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने की कोशिश की जा रही है। अगर तमिलनाडु की बात करें, तो वहां भी मतदान का ग्राफ लगातार मजबूत बना हुआ है। हालांकि बंगाल की तुलना में थोड़ा कम प्रतिशत है, लेकिन यह साफ है कि वहां भी मतदाता गंभीरता से चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। दक्षिण भारत में आमतौर पर स्थिर राजनीतिक माहौल देखा जाता है, लेकिन इस बार वहां भी मुकाबला हल्का नहीं माना जा रहा।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या इस भारी मतदान से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कौन जीत रहा है? इसका सीधा जवाब है अभी नहीं। क्योंकि अभी सिर्फ मतदान चल रहा है, न तो कोई एग्जिट पोल आया है और न ही वोटों की गिनती शुरू हुई है। लेकिन चुनावी ट्रेंड्स को समझने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि इतना ज्यादा मतदान अक्सर या तो सत्ता के खिलाफ नाराजगी का संकेत होता है, या फिर बेहद कड़े मुकाबले का। यानी यह चुनाव किसी एकतरफा नतीजे की ओर नहीं, बल्कि कांटे की टक्कर की ओर बढ़ता दिख रहा है। चुनाव प्रक्रिया शाम 6 बजे तक जारी रहेगी, और इसके बाद ही पूरे दिन का अंतिम मतदान प्रतिशत सामने आएगा। असली तस्वीर तब साफ होगी जब वोटों की गिनती होगी, जो कि निर्धारित तारीख पर की जाएगी। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में जारी यह मतदान एक ऐसा निर्णायक क्षण है, जो आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा तय करेगा।