धुरंधर के दोनों पार्ट रिलीज होते ही एक अजीब और चौंकाने वाला ट्रेंड पाकिस्तान में देखने को मिला, सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो तेजी से वायरल होने लगे जिनमें लोग सड़कों पर दौड़ते हुए, संदिग्ध लोगों को पकड़कर पूछताछ करते हुए और इंडियन स्पाई ढूंढने की बात करते नजर आ रहे हैं। खास तौर पर कराची का ल्यारी इलाका इस पूरे मामले का केंद्र बनकर सामने आया, जहां से कई क्लिप्स शेयर की गईं और दावा किया गया कि लोग फिल्म से प्रभावित होकर जासूसों की तलाश में निकल पड़े हैं। पहली नजर में ये वीडियो किसी फिल्मी सीन जैसे लगते हैं, लेकिन जब इनकी गहराई से जांच की गई तो तस्वीर उतनी सीधी नहीं निकली। कुछ वीडियो वाकई हाल के हैं और उनमें लोकल माहौल, भाषा और घटनाक्रम मेल खाते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सीमित स्तर पर लोगों में शक और उत्तेजना जरूर बढ़ी है। हालाकि इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और इसके साथ ही बड़ी संख्या में ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जो पुराने हैं 2023 या 2024 के लोकल झगड़ों या अपराध से जुड़े फुटेज जिन्हें अब नए नैरेटिव के साथ “स्पाई हंट” बताकर वायरल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, कुछ क्लिप्स पूरी तरह से स्क्रिप्टेड या रीएल-टाइप कंटेंट भी लगते हैं, जिनका मकसद सिर्फ व्यूज और एंगेजमेंट बटोरना है। पाकिस्तान के अंदर इस पूरे ट्रेंड को लेकर लोगों के रिएक्शन भी एक जैसी नहीं है, बल्कि साफ तौर पर तीन हिस्सों में बंटी हुई है। एक वर्ग ऐसा है जो इसे गंभीरता से ले रहा है और देशभक्ति या सुरक्षा के नजरिए से हर अनजान चेहरे को शक की नजर से देख रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले से ही गैंग कल्चर और कानून-व्यवस्था की समस्याएं मौजूद रही हैं। दूसरा वर्ग इसे एक तरह का इंटरनेट मजाक मान रहा है मीम्स, जोक्स और तंज के जरिए लोग इस ट्रेंड का मजाक उड़ा रहे हैं और कह रहे हैं कि “फिल्म देखकर लोग रियल लाइफ में RAW एजेंट ढूंढने निकल पड़े हैं।” वहीं तीसरा वर्ग ऐसा भी है जो इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठा रहा है और यह सोचने को मजबूर है कि क्या लोग अब सिनेमा और हकीकत के बीच का फर्क खोते जा रहे हैं। दरअसल, इस पूरे मामले को समझने के लिए फिल्म के प्रभाव के साथ-साथ सोशल मीडिया के रोल को भी समझना जरूरी है। धुरंधर की कहानी खुद एक संवेदनशील और हाई-वोल्टेज स्पाई नैरेटिव पर आधारित है, जिसमें भारतीय एजेंट, पाकिस्तान के अंदर ऑपरेशन और सीक्रेट मिशन जैसे तत्व शामिल हैं जो सीधे दर्शकों की भावनाओं और कल्पनाओं को ट्रिगर करते हैं। लेकिन असली आग सोशल मीडिया ने लगाई, जहां एक वीडियो हजारों बार शेयर होकर ऐसा माहौल बना देता है जैसे पूरा देश एक ही चीज कर रहा हो। इसके साथ ही भारत-पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद अविश्वास और सुरक्षा से जुड़ा माहौल इस तरह की कहानियों को और तेजी से फैलने का मौका देता है। तो यह कहना गलत नहीं होगा कि इस मामले में सच और झूठ दोनों शामिल हैं। कुछ जगहों पर लोगों की प्रतिक्रिया वास्तविक है, लेकिन उसे जिस स्तर तक दिखाया जा रहा है, वह काफी हद तक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। पूरा ल्यारी या पूरा पाकिस्तान जासूसों की तलाश में नहीं निकला है, लेकिन सोशल मीडिया ने कुछ घटनाओं को इस तरह amplify कर दिया है कि वह एक बड़े ट्रेंड की तरह दिखने लगी हैं। यही इस पूरे मामले की सबसे अहम सच्चाई है आज के दौर में घटनाएं जितनी बड़ी होती हैं, उससे कहीं ज्यादा वायरलिटी हो जाती है।
इस वक्त मिडिल ईस्ट में Iran, Israel और United States के बीच बढ़ता तनाव का कारण और सीधा कनेक्शन तेल से है। ये सिर्फ एक और war नहीं है, ये global economy की backbone पर पड़ा प्रेशर है। दुनिया का करीब 20% oil एक छोटे से choke point Hormuz Strait से होकर गुजरता है, और जैसे ही इस route पर खतरा बढ़ता है, market तुरंत react करता है। Oil prices spike करते हैं, shipping cost बढ़ती है, insurance महंगा होता है और धीरे-धीरे इसका असर ground level तक पहुंचता है। oil महंगा मतलब transport महंगा, transport महंगा मतलब हर चीज महंगी… यानी inflation। और यहीं से ये international tension सीधे आम आदमी की जिंदगी में entry मारता है। भारत जैसे देश, जो अपनी energy का लगभग 85% import करते हैं, उनके लिए ये सीधा pocket issue है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, food prices बढ़ते हैं, और overall cost of living ऊपर चली जाती है। लेकिन मामला सिर्फ economics तक सीमित नहीं है… इसमें power game भी उतना ही बड़ा factor है। History देखो तो 1973 oil crisis हो या Gulf War हर बार जब मिडिल ईस्ट में tension बढ़ा, कुछ देशों की power और influence भी बढ़ी। मतलब ये कि हर war सिर्फ नुकसान की बातें नहीं होती, ये redistribution of power भी होती है। कुछ countries और corporations profit करते हैं, जबकि बाकी economies pressure में आ जाती हैं। और सबसे interesting बात ये है कि ये सब अचानक नहीं होता ये एक chain reaction है। एक तरफ missile चलती है, दूसरी तरफ market हिलता है… और बीच में global system अपनी नई balance खोजने लगता है। इस पूरे scenario में फायदा किसे होगा और नुकसान किसे। क्योंकि ground पर भले ही लड़ाई कुछ देशों के बीच हो रही हो, लेकिन उसका impact global है और आखिर में उसकी कीमत वो आम इंसान देता है, जिसका इस पूरे conflict से कोई सीधा लेना-देना भी नहीं होता। यानी Middle East का ये tension सिर्फ geopolitics नहीं है… ये economy, power और everyday life के लिए interconnected है, जहाँ शुरुआत कहीं भी हो, असर हर जगह पड़ता है।