Latest News

Breaking News 27 February 2026

1 )  क्या अरविंद केजरीवाल हमेशा से शराब घोटाले में बेगुनाह थे ?

दिल्ली में जब नवंबर 2021 में नई आबकारी नीति लागू हुई, तब इसे एक रिफॉर्म बताया गया। सरकार ने कहा अब शराब का कारोबार सरकार नहीं, निजी सेक्टर संभालेगा। सरकारी दुकानें बंद होंगी, लाइसेंस ज़ोन में बांटे जाएंगे, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और राजस्व भी। मॉडल ऐसा पेश किया गया जैसे यह व्यवस्था को आधुनिक बनाने का प्रयोग हो। लेकिन राजनीति में हर प्रयोग के साथ जोखिम भी आता है और इस बार जोखिम सीधे सत्ता की कुर्सी तक जा पहुंचा। जुलाई 2022 में अचानक दिल्ली सरकार ने यह नीति वापस ले ली। आधिकारिक तर्क दिया गया कि उपराज्यपाल द्वारा जांच की सिफारिश और प्रक्रियागत आपत्तियाँ। लेकिन तब तक आरोपों की आंधी उठ चुकी थी। कहा गया कि लाइसेंस वितरण में नियम बदले गए, कुछ कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया, और कथित तौर पर साउथ ग्रुप नामक लॉबी से लगभग 100 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई। यहीं से मामला प्रशासनिक नहीं, आपराधिक हो गई। 17 अगस्त 2022 को CBI ने FIR दर्ज की। आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र IPC 120B , धोखाधड़ी IPC 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएँ शामिल थीं। एजेंसी का दावा था कि आबकारी नीति बनाते समय और बाद में संशोधन करते समय कुछ ऐसे फैसले लिए गए, जिनसे चुनिंदा निजी खिलाड़ियों को लाभ मिला। यह भी आरोप सामने आया कि कथित रिश्वत का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों में किया गया। फिर एंट्री हुई ED की। मनी लॉन्ड्रिंग कानून PMLA के तहत जांच शुरू हुई। एजेंसी ने कहा यह सिर्फ नीति में गड़बड़ी नहीं, बल्कि पैसों के प्रवाह की सुनियोजित मामला है। कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट, गवाहों के बयान सब कुछ चार्जशीट का हिस्सा बना। कई हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियाँ हुईं। राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ी। आरोप यहां तक पहुंचे कि इस पूरे कथित षड्यंत्र के किंगपिन स्वयं मुख्यमंत्री थे। लेकिन दूसरी तरफ, अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उनका कहना रहा कोई सीधी कैश बरामदगी नहीं हुई, कोई ऐसा दस्तावेज़ी प्रमाण नहीं है जो सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को रिश्वत से जोड़ता हो। उनका तर्क साफ था यह केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई है, जिसमें जांच एजेंसियों का इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है। मामला अदालत पहुंचा। राऊज एवेन्यू कोर्ट में लंबी सुनवाई चली। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोप अनुमानों और गवाहों के बयानों पर आधारित हैं, प्रत्यक्ष वित्तीय सबूत नहीं हैं। अभियोजन ने कहा कि साजिश हमेशा सीधे सबूत नहीं छोड़ती, बल्कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला से साबित होती है। अदालत ने कुछ मामलों में राहत दी, कुछ आरोपियों को जमानत मिली, और सबूतों की पर्याप्तता पर सवाल उठाए गए। आज जब अदालत से राहत मिली, तो केजरीवाल भावुक दिखे। उन्होंने कहा ये पूरा केस फर्जी था, हमें बदनाम करने की साजिश थी।  इसे उन्होंने लोकतंत्र की जीत बताया। लेकिन जांच एजेंसी पीछे हटने को तैयार नहीं। CBI ने साफ किया कि वह इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देगी। यानी कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं, बल्कि नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।

 

2 ) सबूत गिरे सियासत जली : अब खुलेगी असली पोल 

दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाले में अपना फैसला सुनाया और ये आदेश चार साल की बहस, आरोप, गिरफ्तारी, जमानत और सियासी हमलों की फाइल पर लगी एक मोटी मुहर थी। अदालत ने कहा  अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने लायक ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। चार्जशीट में खामियां, कथित आपराधिक षड्यंत्र का स्पष्ट आधार नहीं, और आरोप कानूनी कसौटी पर टिकते नहीं। नतीजा यह हुआ अरविंद केजरीवाल समेत अन्य आरोपी बरी हुए। कोर्ट ने साफ कर दिया कि पेश किए गए साक्ष्य दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। फैसले के बाद जो दृश्य सामने आया, वह राजनीति से ज़्यादा भावनात्मक था। अरविंद केजरीवाल बाहर आए, समर्थकों के बीच पहुंचे, और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर कहा पूरे देश से माफी मांगिए। उनका आरोप साफ था यह केस राजनीतिक बदले की भावना से बनाया गया, एजेंसियों का इस्तेमाल कर उनकी सरकार और पार्टी को बदनाम किया गया। उन्होंने कहा कि चार साल तक झूठे आरोपों के जरिए उनकी छवि पर कीचड़ उछाला गया, जेल भेजा गया, और जनता को गुमराह किया गया। लेकिन अदालत ने बता दिया कि आरोप टिके नहीं। केजरीवाल ने इसे सिर्फ कानूनी जीत नहीं, “सच की जीत” बताया। उनका कहना था कि अगर सबूत होते तो अदालत सजा देती, लेकिन जब अदालत ने कहा कि आरोप साबित नहीं हुए, तो फिर यह पूरा मामला क्या था? उन्होंने यह भी दोहराया कि एजेंसियों की कार्रवाई ने लोकतंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। बयान में आक्रोश भी था, चुनौती भी, और राजनीतिक संदेश भी कि वह झुके नहीं हैं। उधर, भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया संयमित लेकिन सख्त रही। पार्टी नेताओं ने कहा कि अदालत का फैसला अपनी जगह है, लेकिन इसे राजनीतिक साजिश का रंग देना गलत है। उनका तर्क है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। साथ ही खबर यह भी है कि सीबीआई इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर सकती है। यानी कानूनी लड़ाई का दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
अब इस लेटेस्ट फैसले का सीधा असर क्या है? एक तरफ केजरीवाल इसे नैतिक और राजनीतिक पुनर्वास की तरह पेश कर रहे हैं। दूसरी तरफ विपक्षी खेमे में यह सवाल बना रहेगा कि क्या सिर्फ सबूतों की कमी का मतलब खत्म हो जाना है? अदालत ने जो कहा वह कानूनी सच है आरोप साबित नहीं हुए। लेकिन राजनीतिक सच की लड़ाई अभी जारी है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा शब्द है सबूत। अदालत ने कहा कि अभियोजन अपने आरोपों को स्थापित नहीं कर पाया। यही लाइन अब दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से इस्तेमाल करेंगे। AAP कहेगी देखिए, झूठा केस था। बीजेपी कहेगी प्रक्रिया चल रही है, अपील होगी। फिलहाल, ताज़ा तस्वीर यही है कोर्ट का फैसला केजरीवाल के पक्ष में गया है। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताया है और देश के शीर्ष नेतृत्व से माफी की मांग की है। मामला कानूनी रूप से इस स्तर पर उनके लिए राहत लेकर आया है, लेकिन राजनीतिक बहस और संभावित अपील की आहट अभी बाकी है।