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Breaking News 28 January 2026

1) India–EU Trade Deal : Everything you Need to know

भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताएं अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी हैं। India–EU Free Trade Agreement को दोनों पक्षों ने रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम समझौता बताया है। इस डील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 90 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर टैरिफ यानी आयात शुल्क को कम या पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। यही वजह है कि इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में “गेम-चेंजर डील” के तौर पर देखा जा रहा है। यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव हो रहा है, चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिशें तेज हैं और भारत खुद को एक मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करना चाहता है। वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आकार लगभग €120 बिलियन करीब 11 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। EU, भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, जबकि भारत भी EU के लिए एशिया के अहम साझेदारों में शामिल है। पिछले एक दशक में दोनों के बीच व्यापार लगभग 90% तक बढ़ चुका है, लेकिन ऊँचे टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स के कारण इसकी पूरी क्षमता सामने नहीं आ पा रही थी। इस FTA के तहत EU अपने 90–91% टैरिफ लाइनों को भारतीय उत्पादों के लिए खत्म या काफी हद तक कम करेगा, जबकि भारत भी करीब 86% टैरिफ लाइनों पर कटौती के लिए सहमत हुआ है। अगर व्यापार के कुल मूल्य value term के हिसाब से देखें, तो यह कवरेज 93–96% तक पहुंच जाती है। सरल शब्दों में कहें तो भारत और यूरोप के बीच जो सामान आता-जाता है, उसका लगभग पूरा हिस्सा अब कम टैक्स या बिना टैक्स के सीमा पार कर सकेगा। इस डील का सीधा असर उन यूरोपीय प्रोडक्ट्स पर पड़ेगा जो अभी भारत में बहुत महंगे हैं। वाइन और स्पिरिट्स पर जहां पहले 100–150% तक टैरिफ लगता था, वहां अब इसे चरणबद्ध तरीके से 30–40% तक लाया जाएगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी बड़ा बदलाव होगा लग्ज़री कारों पर लगने वाला भारी इंपोर्ट ड्यूटी धीरे-धीरे घटाकर 10% के आसपास लाई जा सकती है। इसके अलावा चॉकलेट, प्रोसेस्ड फूड, ऑलिव ऑयल, चीज़, बियर और कुछ मशीनरी आइटम्स भारत में पहले से ज्यादा सस्ते हो सकते हैं। भारत के लिए एक्सपोर्ट का सुनहरा मौका यह डील भारत के निर्यातकों के लिए कहीं ज्यादा अहम मानी जा रही है। टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, जूते, लेदर प्रोडक्ट्स, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स और केमिकल्स जैसे सेक्टरों को EU के 27 देशों के बड़े बाजार में कम टैक्स या जीरो ड्यूटी एक्सेस मिलेगा। फार्मा और मेडिकल डिवाइसेज़ के लिए भी रेगुलेटरी सहयोग बढ़ेगा, जिससे भारतीय कंपनियों को यूरोप में एंट्री आसान हो सकती है। India-EU FTA सिर्फ सामानों तक सीमित नहीं है। इसमें IT और डिजिटल सेवाएं, प्रोफेशनल सर्विसेज, निवेश सुरक्षा, डेटा फ्लो और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। भारत के लिए यह खास है क्योंकि IT और सर्विस सेक्टर देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। साथ ही यूरोपीय निवेशकों के लिए भारत में निवेश का रास्ता और सुरक्षित व पारदर्शी बनेगा। हालांकि यह पूरी तरह खुली छूट वाली डील नहीं है। भारत ने अपने कृषि, डेयरी, चीनी और कुछ खाद्य उत्पादों को संवेदनशील मानते हुए उन पर पूरी टैरिफ छूट नहीं दी है। इसका मकसद घरेलू किसानों और छोटे उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से EU कंपनियों को हर साल करीब €4 बिलियन की टैरिफ बचत हो सकती है, जबकि भारत के निर्यात में भी तेज़ उछाल आने की संभावना है। आने वाले 5–7 वर्षों में भारत-EU व्यापार के लगभग दोगुना होकर $200 बिलियन के करीब पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है यह समझौता फिलहाल कानूनी मंज़ूरी ratification की प्रक्रिया से गुजरेगा। EU संसद, सदस्य देशों और भारत सरकार की औपचारिक स्वीकृति के बाद ही यह पूरी तरह लागू होगा। लेकिन इतना तय है कि यह डील भारत की ट्रेड पॉलिसी और ग्लोबल पोज़िशनिंग में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।

 

2 ) अजित Pawar की मौत कैसे हुई? लास्ट मिनट में क्या हुआ था?

28 जनवरी 2026 की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए एक गहरे सदमे की खबर लेकर आई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गया। यह खबर जैसे ही सामने आई, पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। जानकारी के मुताबिक, अजित पवार उस दिन मुंबई से पुणे जिले के बारामती जा रहे थे। उन्हें वहां राजनीतिक कार्यक्रमों और बैठकों में हिस्सा लेना था। इसके लिए उन्होंने एक चार्टर्ड विमान से यात्रा की थी। विमान में अजित पवार के साथ उनके सुरक्षा कर्मी, स्टाफ और फ्लाइट क्रू मौजूद थे। उड़ान सामान्य रूप से शुरू हुई और शुरुआती समय में किसी तरह की गड़बड़ी की सूचना नहीं मिलीहादसा तब हुआ जब विमान बारामती एयरफील्ड के पास लैंडिंग की प्रक्रिया में था। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, विमान रनवे के करीब आते समय संतुलन खो बैठा। कुछ लोगों ने बताया कि विमान हवा में अस्थिर दिखाई दे रहा था। इसके कुछ ही सेकंड बाद विमान ज़मीन से टकराया और उसमें भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज़ थी कि मौके पर ही सब कुछ जलकर खाक हो गया। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई। राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन आग और धमाके की वजह से किसी को बचाया नहीं जा सका। मलबे से जले हुए अवशेष बरामद किए गए और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया और एयरफील्ड पर आवाजाही रोक दी गई। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर अंतिम क्षणों में ऐसा क्या हुआ, जिससे विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जानकारी में खराब दृश्यता, तकनीकी खराबी या लैंडिंग के समय नियंत्रण खोने जैसी संभावनाओं की बात कही जा रही है। हालांकि, यह साफ किया गया है कि ये सभी बातें अभी अनुमान के स्तर पर हैं। किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय DGCA और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन एजेंसियां इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं। ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, पायलट्स की बातचीत, मौसम की स्थिति और विमान के मेंटेनेंस रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरी तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि हादसा मानवीय चूक था, तकनीकी खराबी थी या कोई और वजह। अजित पवार के निधन के बाद देशभर से शोक संदेश आने लगे। प्रधानमंत्री, केंद्रीय नेताओं, विपक्षी दलों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गहरा दुख जताया। महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की। सरकारी भवनों पर झंडे आधे झुका दिए गए और कई कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। अजित पवार का जाना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा खालीपन छोड़ गया है। वे एक ऐसे नेता थे जो अपने फैसलों, सख्त प्रशासनिक शैली और राजनीतिक पकड़ के लिए जाने जाते थे। उनके समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि वह अब उनके बीच नहीं रहे। फिलहाल पूरा देश जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उस आखिरी लम्हे में विमान के साथ क्या हुआ और यह हादसा क्यों नहीं टल सका। लेकिन इतना तय है कि यह दुर्घटना हमेशा एक सवाल बनकर रहेगी कि सत्ता, सुरक्षा और तकनीक के बावजूद एक इंसानी जान कितनी असहाय हो सकती है।