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Breaking News 3 February 2026

1 ) Union Budget 2026 Exposed: क्या सच में कुछ बदला ? 

1 फरवरी 2026 को निर्मला सीतारमण ने Union Budget पेश कर दिया। अब numbers सामने हैं, घोषणाएं हो चुकी हैं और सरकार अपनी priorities भी साफ कर चुकी है। लेकिन असली सवाल बजट भाषण में नहीं, बल्कि उसके बाद शुरू होता है । क्या इस बजट से आम आदमी की जिंदगी थोड़ी आसान होगी? क्या नौकरीपेशा वर्ग को वाकई कोई राहत मिली है? और जो बिजनेसमैन और उद्योग हैं, उनके लिए यह बजट growth का रास्ता खोलता है या सिर्फ compliance की भाषा बदलता है? Post Budget Analysis का मकसद यही है कि headlines और claims से हटकर यह समझा जाए कि पहले सिस्टम कैसा था, अब क्या बदला है और इन बदलावों का सीधा असर किस पर पड़ेगा। 

सरकार ने अपने budget speech की शुरुआत economy की overall direction से की। बताया गया कि पिछले 12 सालों में भारत की economic policy का core focus stability, fiscal discipline, sustained growth और inflation को control में रखने पर रहा है। Public investment को लगातार push दिया गया, infrastructure को growth engine बनाया गया और आत्मनिर्भर भारत को central theme रखकर domestic manufacturing, energy security और import dependency कम करने की कोशिश की गई। सरकार का दावा है कि इन्हीं नीतियों का असर रहा कि economy करीब 7% growth trajectory पर बनी रही और poverty reduction में भी improvement देखने को मिला। Budget 2026–27 को सरकार ने 3 Kartavya Framework के अंदर रखा है। पहला कर्तव्य है economic growth को accelerate और sustain करना, यानी growth सिर्फ short-term boost न हो बल्कि long-term stable रहे। दूसरा कर्तव्य लोगों की aspirations को पूरा करना और उनकी capacity build करना है, जिसमें skills, employment और opportunities का angle जुड़ा है। तीसरा कर्तव्य है Sabka Saath, Sabka Vikas के principle पर inclusive development, ताकि growth का फायदा society के हर section तक पहुंचे। इस बजट का सबसे बड़ा structural reform New Income Tax Act है। Income Tax Act, 1961 की जगह अब Income Tax Act, 2025 लाया जा रहा है, जो 1 April 2026 से effective होगा। पिछले साल सिर्फ review process की बात हुई थी, लेकिन इस बार पूरा नया Act लागू किया जा रहा है। Simplified rules, redesigned forms और cleaner language का वादा किया गया है। इसमें कोई direct tax rate cut या extra deduction नहीं है, लेकिन यह system-level change है, जिसका long-term impact taxpayers और administration दोनों पर पड़ेगा।
पहले IT sector में अलग-अलग services को अलग-अलग category में देखा जाता था, जिससे tax compliance complex हो जाती थी। Safe Harbour की limit सिर्फ ₹300 करोड़ थी, approval process में tax department की involvement रहती थी और certainty limited time के लिए मिलती थी। Budget 2026–27 में इस पूरे system को simplify कर दिया गया है। अब सभी IT services को एक single category में merge कर दिया गया है। Safe Harbour margin 15.5% तय किया गया है और limit बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ कर दी गई है। Approval पूरी तरह automated होगा और एक बार option चुनने पर यह सुविधा लगातार 5 साल तक valid रहेगी। इसका सीधा मतलब है: compliance आसान, long-term tax certainty और litigation में कमी।

Global Investment और Data Centres

पहले data centres और cloud services से जुड़ी foreign companies के लिए long-term tax policy साफ नहीं थी। India में data centre use करके global services देने पर tax ambiguity बनी रहती थी। अब Budget 2026–27 में सरकार ने clear framework दिया है। Foreign companies जो India-based data centres से global customers को services देती हैं, उन्हें 2047 तक income tax exemption देने का proposal है। Related Indian entities के साथ transactions पर 15% safe harbour margin लागू होगा। यानी अब tax predictability आएगी और investment climate बेहतर होगा। वहीं Biopharma sector के लिए नई Biopharma SHAKTI scheme announce की गई है, जिसमें अगले 5 साल में ₹10,000 करोड़ का outlay रखा गया है। Focus biologics और biosimilars की domestic manufacturing पर है। इसके साथ 3 नए NIPER institutes, 7 existing NIPERs का upgradation और 1000+ clinical trial sites का network develop किया जाएगा। पिछले budget में ऐसी dedicated biopharma scheme नहीं थी, इसलिए इसे sector-specific boost माना जा रहा है।

Semiconductor और Electronics Manufacturing

India Semiconductor Mission 2.0 launch करने का proposal ISM 1.0 का next phase है, जिसमें semiconductor equipment, materials, Indian IP design और skilled workforce पर focus रहेगा। Electronics Components Manufacturing Scheme का outlay ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया गया है, जिससे domestic electronics ecosystem को और मजबूत करने की कोशिश है। Capital goods sector के लिए hi-tech tool rooms, infrastructure equipment के लिए नई schemes और container manufacturing के लिए ₹10,000 करोड़ का allocation propose किया गया है। Textile sector में integrated programme लाया गया है, जिसमें fibre से लेकर skilling और sustainability तक सब कुछ cover किया गया है। Mega Textile Parks को challenge mode में develop करने की बात भी की गई है।
Reform Express और Ease of Doing Business
Independence Day 2025 के बाद अब तक 350 से ज्यादा reforms roll out किए जा चुके हैं। GST simplification, labour codes और quality control orders को rationalise किया गया है। Customs process में trusted importers को immediate clearance, duty deferral period को 30 दिन तक बढ़ाना और advance ruling की validity 5 साल करना ये सब ease of doing business को ground level पर improve करते हैं।

Energy, Critical Minerals और Customs Duty

Lithium-ion battery manufacturing के capital goods पर customs exemption जारी रहेगी। Solar glass के लिए sodium antimonate import पर duty खत्म कर दी गई है। Nuclear power projects के लिए customs exemption को 2035 तक extend किया गया है। Personal use imports पर customs duty 20% से घटाकर 10% कर दी गई है। Cancer और rare diseases की 17 दवाइयों को पूरी तरह duty free किया गया है और 7 नई rare diseases को list में जोड़ा गया है।

Stock Market और STT

Derivatives trading अब महंगी हो गई है। Futures पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05%, options premium पर 0.1% से 0.15% और options exercise पर भी 0.15% कर दिया गया है। साफ संकेत है कि सरकार speculative trading को discourage करना चाहती है। Motor Accident Claims Tribunal से मिलने वाले compensation के interest पर अब income tax और TDS नहीं लगेगा। Foreign travel, education और medical treatment के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर TCS घटाकर 2% कर दिया गया है। Penalty और appeal system में भी राहत दी गई है investigation और penalty एक ही order में, appeal के दौरान penalty पर interest नहीं, pre-deposit 20% से घटाकर 10% और छोटी गलतियों पर जेल खत्म। Maximum सजा भी 7 साल से घटाकर 2 साल कर दी गई है।

States और Government Spending

16th Finance Commission की recommendations accept की गई हैं। Vertical devolution ratio 41% ही रखा गया है और states को ₹1.4 लाख करोड़ दिए जाएंगे। Total expenditure ₹49.6 लाख करोड़ से बढ़कर ₹53.5 लाख करोड़ हो गया है, जबकि capital expenditure ₹11 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹12.2 लाख करोड़ पहुंच गया है। आम आदमी, taxpayer और industry तीनों के लिए इसमें अलग-अलग layers में relief और direction छिपी हुई है। अब असली परीक्षा implementation की होगी, क्योंकि बजट का असर कागज से निकलकर जमीन पर तभी दिखेगा, जब ये reforms सही तरीके से लागू होंगे।

 

2 )  धुरंधर 2 ने चुना लगा दिया 

सोचिए मोबाइल पर अलार्म लगा है, 12 बजने में बस कुछ सेकंड बाकी हैं। दिल कह रहा है अब कुछ नया दिखेगा। स्क्रीन खुलती है, वीडियो चलता है… और दिमाग बोलता है, अरे ये तो देखा हुआ है! बस यहीं से कहानी पलट गई। धुरंधर टू के नाम पर जो टीज़र आया, उसने दर्शकों को उत्साहित कम और चौंकाया ज़्यादा वो भी ऐसे कि चौंकने के साथ हल्की-सी हंसी और भारी-सा गुस्सा दोनों साथ आ गए। असल मसला ये नहीं कि वीडियो छोटा था। मसला ये है कि नया बताकर पुराना परोस दिया गया। वही फुटेज, वही सीन, वही क्लिफहैंगर जो पहले पार्ट के आखिर में दिखाया जा चुका था। फर्क बस इतना कि इस बार उस पर Part 2 Teaser की स्टिकर चिपका दी गई। और फिर क्या सोशल मीडिया ने फैसला सुना दिया चूना लगा दिया! आज का दर्शक अब सिर्फ सिनेमा नहीं देखता, इरादा पढ़ता है। उसे पता है टीज़र क्या होता है और ट्रेलर क्या। इसलिए जब काउंटडाउन, बड़ा दावा और नई उम्मीदें बनें तो बदले में नई झलक मिलनी चाहिए। यहां गलती कंटेंट की कम और कम्युनिकेशन की ज़्यादा लगी। अगर इसे रिकैप टीज या रिमाइंडर क्लिप कहा जाता, तो शायद मामला इतना नहीं बढ़ता। लेकिन नाम बड़ा, दावा बड़ा और डिलीवरी पुरानी। नतीजा? सोशल मीडिया पर मिनटों में कोर्ट लग गई। कहीं तंज ये पार्ट 2 नहीं, पार्ट 1.5 है। कहीं मीम Expectation vs Reality। रिव्यूअर्स ने भी साफ कहा कि ये टीज़र से ज़्यादा मार्केटिंग ट्रिक लगता है। कुछ लोगों को लगा दर्शकों को हल्के में लिया गया, तो कुछ बोले हाइप बनाए रखने के चक्कर में उल्टा नुकसान हो गया। हालांकि हर आवाज़ गुस्से वाली नहीं थी। कुछ लोगों ने कहा टीज़र पूरा ट्रेलर नहीं होता, ये बस इशारा है। मुमकिन है असली धमाका बाद में हो। लेकिन डिजिटल दौर की सच्चाई ये है कि पहला रिएक्शन ही आख़िरी इम्प्रेशन बन जाता है। सफाई बाद में आए, तो फैसला पहले हो चुका होता है। अब सवाल सीधा है फुल ट्रेलर कब? फिलहाल कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं। लेकिन माहौल देखकर तीन रास्ते साफ दिखते हैं पहला, जल्दी ट्रेलर डालकर डैमेज कंट्रोल। दूसरा, किसी बड़े इवेंट या खास तारीख पर असली ट्रेलर लॉन्च। तीसरा, ट्रेलर को और दमदार बनाकर देर से उतारना ताकि अगली बार सवाल न उठें। एक बात तय है आज जो आया, वो ट्रेलर नहीं था। और क्या धुरंधर part 2 dangal का all time रिकार्ड तोड़ पाएगी कमेन्ट ज़रूर करें.