पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक नाम लगातार ट्रेंड कर रहा है Epstein Files। X, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सऐप पर पोस्ट्स की बाढ़ है। कहीं दावा किया जा रहा है कि सब कुछ एक्सपोज़ हो गया, कहीं कहा जा रहा है कि अब बड़े नेताओं की पोल खुलेगी। इसी शोर में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi का नाम भी घसीटा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह सच में कोई बड़ा खुलासा है, या फिर सोशल मीडिया का बनाया हुआ नैरेटिव? Epstein Files असल में अमेरिका में एक हाई-प्रोफाइल अपराधी Jeffrey Epstein से जुड़ी जांच का हिस्सा हैं। Epstein पर नाबालिगों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर आरोप साबित हुए थे। उसकी जांच के दौरान अमेरिकी एजेंसियों ने लाखों पेज के दस्तावेज़, ई-मेल्स, नोट्स और निजी कमेंट्स इकट्ठा किए। बाद में इन्हीं दस्तावेज़ों को पारदर्शिता के तहत सार्वजनिक किया गया, जिन्हें आज Epstein Files कहा जा रहा है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इन फाइल्स में किसी का नाम आ जाना अपने-आप में अपराध का सबूत नहीं होता। इन दस्तावेज़ों में कई जगह Epstein की निजी राय, उसकी सोच, उसके अनुमान और उसकी बकवास टिप्पणियां भी दर्ज हैं। यानी हर लाइन को कोर्ट का फैसला मान लेना एक बड़ी गलती होगी। अब बात पीएम मोदी के नाम की। सोशल मीडिया पर जो दावा किया जा रहा है, वह Epstein द्वारा लिखे गए एक ई-मेल या नोट के एक छोटे से हिस्से पर आधारित है। उस टेक्स्ट में Epstein ने 2017 में पीएम मोदी की Israel यात्रा का जिक्र करते हुए एक व्यंग्यात्मक और अपमानजनक टिप्पणी की थी। यही लाइन काट-छांट कर सोशल मीडिया पर इस तरह पेश की जा रही है, जैसे कोई बड़ा राज़ सामने आ गया हो। असलियत यह है कि 2017 में नरेंद्र मोदी का इज़राइल जाना कोई छुपी हुई या संदिग्ध घटना नहीं थी। यह भारत की ओर से पहली आधिकारिक प्रधानमंत्री स्तर की यात्रा थी, जिसे पूरी दुनिया ने कवर किया। यह यात्रा भारत-इज़राइल रिश्तों के लिहाज़ से एक ओपन डिप्लोमैटिक मूव थी, न कि कोई गुप्त मिशन। Epstein की टिप्पणी सिर्फ़ उसकी अपनी सोच थी न कोई मीटिंग, न कोई संपर्क, न कोई रिश्ता साबित होता है।
अब सबसे अहम सवाल क्या Epstein Files में ऐसा कोई सबूत है जो पीएम मोदी को Epstein के अपराधों से जोड़ता हो? जवाब साफ़ है नहीं। न तो किसी जांच एजेंसी ने ऐसा कहा है, न किसी कोर्ट ने, न किसी दस्तावेज़ में यह दिखता है कि मोदी और Epstein के बीच कभी कोई संपर्क रहा हो। न ई-मेल, न कॉल, न मीटिंग, कुछ भी नहीं। भारत सरकार ने भी इस पूरे मामले पर साफ़ रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह एक दोषी अपराधी की निराधार और घटिया टिप्पणियां हैं, जिनका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार के मुताबिक, पीएम मोदी की इज़राइल यात्रा पूरी तरह आधिकारिक और सार्वजनिक थी, और उसे किसी अपराधी की सोच के आधार पर गलत तरीके से पेश करना भ्रामक है। फिर सवाल उठता है कि सोशल मीडिया पर इतना बवाल क्यों? इसकी वजह है आज का वायरल कल्चर। जब Epstein जैसे बदनाम नाम के साथ किसी बड़े नेता का नाम जोड़ दिया जाता है, तो पोस्ट अपने-आप फैल जाती है। लोग पूरा डॉक्यूमेंट नहीं पढ़ते, बस एक लाइन देखते हैं और निष्कर्ष निकाल लेते हैं। AI से बने ग्राफिक्स, अधूरे स्क्रीनशॉट और आक्रामक कैप्शन इस आग में घी डालते हैं।
बड़ी तस्वीर यह कहती है कि Epstein Files बहुत गंभीर और संवेदनशील दस्तावेज़ हैं, लेकिन उनमें दर्ज हर नाम अपराधी नहीं होता। पीएम मोदी के मामले में अब तक कोई कानूनी आरोप, कोई जांच और कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। जो कुछ वायरल हो रहा है, वह ज़्यादातर Epstein की लिखी निजी राय और सोशल मीडिया की अपनी राजनीति है। हालाकि इसमें कौन सी पर्तें खेलेंगी ये जरूर देखने लायक होगा.