कल की रात जियोप्लोटिक्स के लिए दुनिया की सबसे खतरनाक रातों में से एक थी, जहां एक सोशल मीडिया पोस्ट ने करोड़ों लोगों की नींद उड़ा दी। Donald Trump का एक मैसेज आया
सीधा, ठंडा और खौफनाक, जिससे लगभग ये कंफर्म था कि शायद ये ईरान की आखिरी रात हो… उस वक्त दुनिया का हर बड़ा न्यूज़रूम, हर डिफेंस एक्सपर्ट, हर सरकार एक ही सवाल पूछ रही थी, क्या आज रात इतिहास बदलने वाला है? और जवाब… लगभग हाँ था। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को लेकर एक चेतावनी ट्रंप ने दी, एक ऐसा समुद्री रास्ता…जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। अगर ये बंद होता तो सिर्फ ईरान नहीं, पूरी दुनिया हिल जाती। पेट्रोल महंगा होता, बाजार गिरते, अर्थव्यवस्था डगमगाती। और इसी बिंदु पर Donald Trump ने सीधा दबाव बनाया यानी रास्ता खोलो… या परिणाम भुगतो। ये एक अल्टीमेटम था… और अल्टीमेटम का मतलब होता है अब बातचीत नहीं होगा, स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि मिलिट्री मूवमेंट शुरू हो चुका था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले की तैयारी पूरी थी… और सिर्फ 90 मिनट बाद मिसाइलें गिरने वाली थीं। दुनिया उस मोड़ पर पहुंच चुकी थी जहां एक बटन दबता… और इतिहास बदल जाता। लेकिन ठीक उसी समय…मामले ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। इस पूरे मामले में अचानक एंट्री हुई Pakistan की। शहबाज शरीफ़ और असीम मुनीर आए और इन दोनों ने पर्दे के पीछे तेजी से बातचीत शुरू की। एक तरफ अमेरिका से बात हो रही थी दूसरी तरफ ईरान से संपर्क हो रहा था और फिर जो हुआ वो geopolitics का सबसे बड़ा last-minute twist था। हमले से ठीक पहले Donald Trump मान गए। और 2 हफ्ते का सीजफायर घोषित हुआ, ईरान तैयार हुआ Strait of Hormuz खोलने को, अमेरिका तैयार हुआ हमला रोकने को, इसका मतलब साफ था दुनिया को फिलहाल राहत मिल गई। लेकिन ये स्थायी शांति नहीं है… ये सिर्फ एक pause button है। जैसे किसी फिल्म में गोली चलने से पहले अचानक स्क्रीन freeze हो जाए। इस पूरे जंग में अब सबसे दिलचस्प सवाल ये है कि Pakistan ने ये सब क्यों किया? इसके पीछे सिर्फ शांति नहीं… रणनीति भी थी। अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध भड़कता तो उसका असर सीधे पाकिस्तान पर पड़ता। तेल संकट, आर्थिक दबाव, क्षेत्रीय अस्थिरता सब कुछ। लेकिन इसके साथ-साथ ये एक मौका भी था। खुद को एक global mediator के रूप में पेश करने का। और पाकिस्तान ने वही किया एक ऐसा दांव खेला, जिससे वो अचानक इस कहानी का key player बन गया। लेकिन क्या सब शांत हो गया? नहीं… असली कहानी यहीं है, सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद तनाव फिर दिखने लगा। रिपोर्ट्स आईं मिसाइलें फिर चलीं… हमले की आशंका बनी रही। Iran ने साफ कहा युद्ध खत्म नहीं हुआ है।
वहीं दूसरी तरफ Donald Trump ने दावा किया हम जीत गए।
यानी… दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत की कहानी लिख रहे हैं।
असल में सच्चाई ये है कि कोई नहीं जीता। बस एक बड़ा युद्ध…
अभी के लिए टल गया। तो क्या ये सब स्क्रिप्ट था… या असली डर? ये सवाल सबसे मुश्किल है। क्या ये सब पहले से तय था? या सच में दुनिया एक युद्ध से बची? सच्चाई शायद बीच में है। खतरा असली था लेकिन आखिरी वक्त पर उसे ontrol किया गया दोनों पक्षों ने इसे अपने-अपने तरीके से इस्तेमाल किया
यानी… ये पूरी तरह स्क्रिप्ट नहीं थी… लेकिन पूरी तरह अचानक भी नहीं। कल रात दुनिया न्यूक्लियर युद्ध के इतने करीब थी, कि बस एक आदेश बाकी था। और आज…वो आदेश रुक गया है। लेकिन सच ये है युद्ध खत्म नहीं हुआ… बस अपनी अगली तारीख का इंतजार कर रहा है।